Tuesday, December 30, 2025

तेरी यादों की फ़िज़ा ( ग़ज़ल)

तेरी यादों की फ़िज़ा ( ग़ज़ल)

तेरी यादों की फ़िज़ा में जीता रहा
बीते हुए लम्हों की छाया में जीता रहा

शाम की तन्हाइयों ने जब पुकारा मुझे
मैं तेरी ख़ामोश सदाओं में जीता रहा

वो जो कह न सका लबों की सरहद पर
मैं उन्हीं अनकही दुआओं में जीता रहा

हर एक मोड़ पे ठहरती रही तेरी महक
मैं तेरे छोड़े हुए रास्तों में जीता रहा

ख़्वाब टूटे तो भी आँखों ने न छोड़ा यक़ीं
मैं तेरे वादों की वफ़ा में जीता रहा

जी आर कहे तो क्या कहे इस बेबसी का हाल
तेरे ही नाम की दुनिया में जीता रहा

जी आर कवियुर 
30 12 2025 
( कनाडा, टोरंटो)
 

No comments:

Post a Comment