Monday, December 29, 2025

जब सत्य आवाज़ बन जाता है

जब सत्य आवाज़ बन जाता है  

ओ ओ ओ ओ  
आह आहा ह ह  

समय की सीमाओं को पार करने वाले मार्ग  
क्षण जब घड़ियां अपना अर्थ खो देती हैं  
प्रकाश और छाया मोड़ों पर मिलती हैं  
केवल विचार ही इस स्थान में रहते हैं  

नाम और रिश्ते मिट जाते हैं  
भूख और विश्राम यात्रा में विराम हैं  
छोड़ा हुआ दर्द शब्दों में खिलता है  
अपना कोई नाम नहीं  

दूसरों के आँसुओं का बोझ उठाना  
खुशी बाँटना, दुख लेना  
दुनिया के साथ चलना, अकेलेपन में मिलना  
सत्य स्वयं कवि की आवाज़ बन जाता है

जी आर कवियुर 
29 12 2025 
( कनाडा, टोरंटो)

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