Friday, December 26, 2025

दूर हुई जब ( ग़ज़ल)

दूर हुई जब ( ग़ज़ल)

तू जब पास थी, क्या जाना तेरा होना  
अब जब दूर हुई, हर राह वीराना (2) 

तेरी मुस्कान की क़दर क्यों न की हमने  
अब तेरे बिना, हर लम्हा मेहफ़ूज़ आना(2)  

वक़्त की ठोकरें अब समझा गई हमें,  
जिसे खो दिया, वो लौट कर न आता ना (2)

तेरी यादों का आँचल अब ढूँढता है मुझे,  
तेरे बिना जीवन का हर पल सूना सा जाता ना (2)

पास थी जब तेरी ख़ुशबू हवा में बसी थी  
अब दूर होने पर भी वो हर साँस में समाना (2)

जी आर की कलम से लिखा यह ग़ज़ल  
जिसने खोया तुझे, अब सिर्फ़ यादें हैं बाकी(2)


जी आर कवियुर 
26 12 2025
(कनाडा, टोरंटो)

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