Monday, December 29, 2025

रूह की मुस्कान ( ग़ज़ल )

रूह की मुस्कान ( ग़ज़ल )

मेरे दिल के आईने में जो चाँद दिखता है  
औरों से ज़्यादा सुंदर, बहुत अनमोल दिखता है(2)  

हवाओं में घुला तेरा नाम महसूस होता है  
हर साँस में तेरी याद का मीठा संगीत झलकता है(2)  

रात की तन्हाई में तेरी हँसी गूँजती है  
सितारों की तरह हर पल तू मेरे दिल को छू जाता है (2) 

तेरी आँखों के जादू से दुनिया रंगीन हो जाती है  
हर नजर में बस तेरा ही चेहरा मुस्कुराता है (2)

तेरी यादों की खुशबू हर पल मुझे बहलाती है  
हर फिज़ा में घुल कर मेरा दिल मुस्कुराता है (2) 

तेरे बिना जीना लगता है जैसे अधूरी दास्तान  
हर शेर में जी आर को बस तू ही तू, मेरी रूह को रोशन कर जाता है(2)


जी आर कवियुर 
28 12 2025 
( कनाडा, टोरंटो)

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