Monday, December 29, 2025

तस्वीर नहीं मिटती ( ग़ज़ल )

तस्वीर नहीं मिटती ( ग़ज़ल )


दिल की दीवार पे बनाई हुई तस्वीर नहीं मिटती  
दरारें कितनी भी हों, वही तस्वीर नहीं मिटती  

आँखों से बह गया जो, वो पानी तो सूख जाता  
मन में जो बस गई हो, वो तस्वीर नहीं मिटती  

वक्त ने कितना भी बदला हो मौसम का रंग  
बीते दिनों की कोई तस्वीर नहीं मिटती  

शब्दों से जो न कह पाए, खामोशी कह जाती  
अनकही भावनाओं की तस्वीर नहीं मिटती  

टूटे हुए सपनों से दिल चाहे जितना भागे  
विश्वास से बनी हुई तस्वीर नहीं मिटती  

जी आर के मन में जो उभरी सच्चे भावों से  
लिख दी गई कविता की तस्वीर नहीं मिटती

जी आर कवियुर 
28 12 2025 
( कनाडा, टोरंटो)

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