Friday, December 26, 2025

“तेरी निगाहों का जाम” (ग़ज़ल)

“तेरी निगाहों का जाम” (ग़ज़ल)

साथिया तू गई तो मुझपर, सखियों की राज मुझपर है  
तेरी निगाहों की नशीली मस्ती, जाम सा राज मुझपर है (2)

तेरी आँखों की नशीली बोतल ने, दिल मेरा पी लिया  
हर खुशी थी बेवजह, हर ग़म भी जी लिया है(2)  

शबनम सी आँखों ने, रातों में मुझको जलाया  
हर सपना तेरी यादों का जाम सा छलकाया है(2)  

नशा तेरी हँसी का, मदहोश कर गया मुझे  
वो जाम नहीं, वो प्यार था, जो खो गया मुझे है(2)  

साथ चलना था जो राहों में, खो गया वो फसाना  
तेरी चाल की तासीर ने, बना दिया मुझको दीवाना है(2)  

लहरों सा बहता है अब, तेरी यादों का जाम  
दिल की प्यास बुझाए ना, बस रहा उस नाम है (2) 

लहरों सा बहता है अब, तेरी यादों का जाम  
दिल की प्यास बुझाए ना, बस रहा उस नाम है (2) 

जी आर की कलम से लिखा, दिल का ये बयान  
तेरी निगाहों की शराब में, जीने का ग़म जान है(2)


जी आर कवियुर 
26 12 2025
(कनाडा, टोरंटो)



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