Friday, December 26, 2025

संकुलता की कथा (कविता)

संकुलता की कथा (कविता)

भूमिका

यह कविता प्रकृति की जटिलताओं और जीवन की स्मृतियों और विचारों की परतों को दर्शाती है। हर कदम, हर छोटा दरार अर्थपूर्ण है। पाठक कविता पढ़ते समय प्रकृति की सुंदरता, उसकी गहराई और हृदय में फैलने वाली शांति का अनुभव करेंगे।

संकुलता की कथा (कविता)

गहरे परत वाले पत्थर फैलते हैं,
हवा के साथ मौन बहते हैं।
छायाएँ तूफान में थरथराती हैं,
सूर्य की किरण दरारों में खिलती है।

पत्थरों के समूह गुप्त ताल खोजते हैं,
मन के विचारों की तरह उलझे हुए।
छोटे फैले हुए दरारें
स्मृतियों में छिपी रहती हैं।

विशाल आकार चलते रास्तों पर चमकते हैं,
धीरे से ढके रहस्य बने रहते हैं।
प्रकृति की दृष्टि में छिपकर,
वातावरण एकांत में प्रवेश करता है।

जी आर कवियुर 
26 12 2025
(कनाडा, टोरंटो)

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