Sunday, June 28, 2026
दो ज़ुबाँ, एक दिलരണ്ട് ഭാഷകൾ, ഒരു ഹൃദയം
रैन बसेरा / രാവിൻ അഭയം (द्विभाषी ग़ज़ल / ദ്വിഭാഷാ ഗസൽ)
गहराइयों की पुकार(ग़ज़ल)
Friday, June 26, 2026
मुश्किलों के सफ़र में (ग़ज़ल)
वर्षा की प्रतीक्षा करती धरती
यादों की रजनीगंधा ( ग़ज़ल)
गहराइयों की पुकार
Wednesday, June 24, 2026
रात और रजनीगंधा
शून्यता का रंग
मंद पड़ता दीपक
दूरियों का मौन
अपरिचित पथ का किनारा
അറിയാതെ / Anjane Mein (bilungal song)
Tuesday, June 23, 2026
खिड़की के उस पार
भीतर का नूर | ഉള്ളിലെ ജ്യോതി A Bilingual Hindi–Malayalam Ghazal
Monday, June 22, 2026
पिता को नमन | അച്ഛന് ഒരു നമനം ( ഗസൽ/गज़ल)
Saturday, June 20, 2026
योग से निरोग जीवन
अनिद्र स्वप्न
उस पार का प्रकाश
ओस की बूंद की यात्रा
खिड़की के उस पार
Wednesday, June 17, 2026
कौन कहता है मैं ?!!
इकसठ का सफ़र (ग़ज़ल)
इकसठ का सफ़र (ग़ज़ल)
मैं आज इकसठ का हूँ मगर दिल से जवान हूँ,
ज़िंदगी के नशे में अब तलक डूबा हुआ हूँ।
सच को लेकर इस जहाँ में कब किसी से क्या कहा हूँ,
अपने ही एहसास की दुनिया में अक्सर रह गया हूँ।
मन में जो आया उसे काग़ज़ पे लिखना चाहता था,
जाने कितनी बार ख़ुद को रोक कर फिर रह गया हूँ।
अंगूठे की कैद में दिन-रात यूँ उलझा रहा मैं,
मोबाइल के जाल में अनजाने ही फँस गया हूँ।
चाँद खिड़की पर खड़ा था, चाँदनी आवाज़ देती,
स्क्रीन की चमक में लेकिन उससे भी कट गया हूँ।
दोस्त मिलते हैं मुझे अब सिर्फ़ तस्वीरों के भीतर,
भीड़ में रहकर भी देखो किस क़दर तनहा हुआ हूँ।
अपनों के उजले कल की ख़ातिर दूरियों को चुन लिया,
आज उनको कामयाब देख कर खुश हो रहा हूँ।
मैं 'जी आर' कहता हूँ, सुन लो मेरी पहचान भी,
उम्र के इस मोड़ पर भी ख़्वाब में जीता हुआ हूँ।
जी आर कवियूर
16 06 2026
( तिरुवल्ला, कवियुर)
सच्ची मित्रता: सबसे सुरक्षित निवेश (बाजार जोखिम से परे)
Sunday, June 14, 2026
तुम अभी भी युवा हो
तेरे बिना(ग़ज़ल)
ईर्ष्या की आग — അസൂയയുടെ തീ(द्विभाषी ग़ज़ल / ദ്വിഭാഷാ ഗസൽ)
मन जो रूठा (गीत)
कृत्रिमता और पाखंड | കൃത്രിമത്വവും കപടതയും (Ghazal) | GR kaviyoor
कृत्रिमता और पाखंड | കൃത്രിമത്വവും കപടതയും (Ghazal) | GR kaviyoor
रहे राह पर,
श्वास बनता जीवन
अदृश्य सत्य
स्थिर लहर
सूर्य और अंधकार का संवाद
मौन की ग़ज़ल / മൗനത്തിന്റെ ഗസൽद्विभाषी ग़ज़ल / ദ്വിഭാഷാ ഗസൽ
വിരഹത്തിൻ്റെ ഗസൽ / विरह की ग़ज़ल
बहता हुआ समय
तेरी ही परछाई
दिन का अंतिम क्षण
पीछे मुड़कर देखती राहें
आँखों की खामोशी
प्रकाश की पंक्तियाँ
तेरी बेवफ़ाई से लगता है डर"( ग़ज़ल)
Thursday, June 11, 2026
मन जो रूठा (गीत)
Wednesday, June 10, 2026
नक़ाब उठने दो - അഴിയട്ടെ മുഖംമൂടികൾ (ബഹുഭാഷാ ഗസൽ / bilungal gazhal)
Sunday, June 7, 2026
मौन की ग़ज़ल / മൗനത്തിന്റെ ഗസൽ द्विभाषी ग़ज़ल / ദ്വിഭാഷാ ഗസൽ
Thursday, June 4, 2026
तेरी बेवफ़ाई से लगता है डर"( ग़ज़ल)
सागर की एक कहानी
सागर की एक कहानी
गहरे सागर के नीले पानी में,
तैरती थी एक नन्हीं सी जान।
छोटी सी ज़िंदगी, छोटा सा सुक़ून,
लहरों के संग बहती अनजान।
तभी बुलाते एक जाल के घेरे में,
थम गई उस मासूम की साँस।
इंसानी हाथों ने छीन लिया,
उस छोटे से जीवन का एहसास।
प्रकृति का यह नियम बड़ा अजीब है,
एक का जीवन, दूजे का आहार।
आज उसका अंत हुआ, कल हमारी बारी,
यही तो है इस सृष्टि का व्यवहार।
जैसे ही उठते हैं भारी जाल आसमान की ओर,
खत्म हो जाती है उस मछली की दास्ताँ।
आते-जाते रहते हैं यहाँ सब मुसाफ़िर,
पर अमर रहता है यह अनंत आसमाँ।
जी आर कवियुर
03 06 2
026
(तिरुवल्ला, कवियुर)

















