Saturday, June 20, 2026

अनिद्र स्वप्न

अनिद्र स्वप्न

रात में पलकों ने विश्राम न पाया,
मन में अनेक चित्र उभरते रहे,
अभिलाषाओं ने रंगों को सजाया,
आने वाले कल की राहें दिखीं।

चाँदनी ने पथों पर उजास बिखेरा,
विचार दूर क्षितिजों तक पहुँच गए,
कल्पनाओं ने अपने पंख फैलाए,
लक्ष्य दीपक बनकर आगे चमका।

नई भोर की प्रतीक्षा बनी रही,
जागृति ने नए मार्ग खोज लिए,
संकल्प ने भीतर शक्ति संजोई,
जीवन ने उपलब्धियाँ लिख डालीं।

जी आर कवियुर 
21 06 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)

No comments:

Post a Comment