कौन कहता है मैं ?!!
नमस्कार मित्रों, मैं हूं जी आर कवियूर। लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं, "क्या सचमुच आप कवि हैं?"
तब मैं हंसकर कह देता हूं—
कौन कहता है मैं कभी कवि हूं, हां, मैं कपी जरूर हूं आज भी। चंचल होकर कूदता रहता, कभी-कभार कुछ लिखता भी।
मन में जो भी खुराफात आई, शब्दों में उसे ढाल दिया। हां, मैं रहने वाला कपीयूर का, कहते-कहते कवियूर हुआ।
डाल-डाल पर मन उड़ जाता, सपनों का संसार सजाता। हंसी, शरारत, यादों के मोती, कागज़ पर चुपचाप बिखराता।
न नियमों में खुद को बांधा, न राहों का हिसाब रखा। दिल ने जो भी बात सुनाई, उसका सीधा जवाब लिखा।
कभी धूप का गीत सुनाया, कभी सावन की बात कही। जीवन की छोटी घटनाओं में, अपनी एक दुनिया गढ़ी।
कपी हूं तो चंचलता मेरी, कवि हूं तो संवेदना भी। दोनों मिलकर साथ निभाते, यही पहचान है अब मेरी।
यदि मेरी बातों में आपको अपना अक्स दिख जाए, तो समझ लीजिएगा— मेरी खुराफात सफल हो जाए।
जी आर कवियुर
15 06 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)

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