Sunday, June 14, 2026

श्वास बनता जीवन

श्वास बनता जीवन

भोर की पहली साँस के साथ,
जीवन फिर से जाग उठा।
हर पल की लय में,
समय ने अपना संगीत बिखेरा।

हँसी और पीड़ा दोनों में,
अर्थ खिलते चले गए।
यात्रा के हर कदम पर,
अनुभव फूलों से खिल उठे।

अनजाने बीत गए दिन,
हृदय में प्रकाश बन गए।
श्वास बनता यह जीवन,
आशा बनकर चलता रहा।

GR kaviyoor 
10 06 2026

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