Sunday, June 14, 2026

दिन का अंतिम क्षण

दिन का अंतिम क्षण

सूरज की मद्धिम होती आभा,
क्षितिज में विलीन हो गई।
दिन का अंतिम क्षण,
संध्या की गोद में उतर आया।

पेड़ों की फैली परछाइयों ने,
लंबे रास्ते खींच दिए।
पक्षियों की घर लौटती उड़ान,
आकाश पर अपनी रेखा छोड़ गई।

दिनभर की सारी व्यस्तताएँ,
खामोशी में खो गईं।
दिन के अंतिम क्षण में,
मन ने शांति पा ली।

जी आर कवियुर 
06 06 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर)





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