Friday, June 26, 2026

मुश्किलों के सफ़र में (ग़ज़ल)

मुश्किलों के सफ़र में (ग़ज़ल)



मुश्किलों के सफ़र में मुस्कुरा कर चले,
दर्द जितना मिला हो, हम सँवर कर चले।

राह में कितने काँटे थे, न गिनते रहे,
ख़्वाब आँखों में लेकर हम निखर कर चले।

धूप ने आज़माया तो झुके ही नहीं,
छाँव की आस दिल में हम उभर कर चले।

वक़्त ने हर क़दम पर नई ठोकर दी,
हौसलों का दिया लेकर ठहर कर चले।

ग़म के दरिया कई बार हमें घेर गए,
दिल में उम्मीद जगाकर हम गुज़र कर चले।

जो भी अपने थे, कुछ राह में बिछुड़ते गए,
उनकी यादों को सीने में उतर कर चले।

'जी आर' उम्र भर इश्क़-ए-सुख़न में रहे,
दर्द को गीत बनाकर हम निखर कर चले।

जी आर कवियूर
25 06 2026
( तिरुवल्ला, कवियुर)

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