Friday, June 26, 2026

वर्षा की प्रतीक्षा करती धरती


वर्षा की प्रतीक्षा करती धरती

गर्मी में धरती थककर चुप हुई,
दरारों में मौन पीड़ा बस गई,
नज़रें बादलों को खोजती रहीं,
आशा आकाश को निहारती रही।

समीर संदेश लेकर आई,
गरज ने उम्मीद का गीत सुनाया,
बिजली ने मुस्कान-सी रेखा खींची,
प्रकृति ने साँस रोक ली।

पहली बूंद जैसे ही मिट्टी पर गिरी,
सुगंध ने हृदय को भर दिया,
जीवन फिर से अंकुर बन जागा,
धरती कृतज्ञ होकर मुस्कुराई।

जी आर कवियुर 
26 06 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)

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