दूर किनारे पर एक उजाला चमका,
लहरें अपना संदेश तट तक लाई,
इच्छा नाव बनकर आगे बढ़ी,
साहस ने हर कदम का मार्ग दिखाया।
विशाल विस्तार नदी-सा फैला,
चप्पुओं में उम्मीद की गति जागी,
अनदेखे दृश्य पास चले आए,
हृदय में विस्मय के पुष्प खिले।
उस आभा में नया युग दिखाई दिया,
कल्पना ऊँचाइयों की ओर बढ़ी,
सफलता मुस्कान लेकर आई,
जीवन सुंदरता के साथ चलता रहा।
जी आर कवियुर
20 06 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)
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