Sunday, June 14, 2026

अदृश्य सत्य

अदृश्य सत्य

अनदेखी राहों के बीच,
सत्य कहीं छिपा हुआ था।
जो शब्द कभी कह न सके,
उसे खामोशी ने प्रकट किया।

छायाओं से भरे क्षणों में,
प्रकाश ने अपना अर्थ पाया।
ओट की पतली परत के पीछे,
जीवन ने अपना चेहरा दिखाया।

बिना खोजे मिले उत्तर,
मन में उजाला बन गए।
उस अदृश्य सत्य के साथ,
ज्ञान भी बढ़ता गया।

Gr kaviyoor 
10 06 2026

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