तेरे बिना
(ग़ज़ल)
कैसे इंकार करूँ इन बीती यादों को,
दिल ने सँभाल रखा है सारी यादों को।
बरसात की हर बूँद तेरा ज़िक्र छेड़ती है,
मैं सुनता रह जाता हूँ तेरी बातों को।
तन्हाई की चादर में जब रात सिमटती है,
आँखें ढूँढ़ा करती हैं गुज़री रातों को।
भीगा हुआ मौसम भी तेरा नाम लेता है,
दिल याद किया करता है उन बरसातों को।
वक़्त की धूल ने ढक डाले कितने चेहरे,
दिल गिनता ही रहता है उन मुलाक़ातों को।
तेरी महक अब भी साँसों में बसी है ऐसे,
जैसे कोई सँजोए रखे अपने जज़्बातों को।
दुनिया ने बदल डाले कितने रंग मगर,
हम भूल न पाए अपने ही हालातों को।
मैं 'जी आर' अब भी भूल न पाया उसे,
दिल से न मिटा पाया बीती यादों को।
जी आर कवियुर
12 06 2026
(कवियूर , तिरुवल्ला)
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