दूरियाँ लंबी राहों में बदल गईं,
पथ अनेक दिशाओं में मुड़ गए,
दृश्य स्मृतियों में बसे रहे,
मिलन हृदय में जीवित रहा।
पत्र आए बिना समय बीत गया,
शब्द कहे बिना ही खो गए,
स्पंदन भीतर गूंजता रहा,
बंधन मौन में और गहरा हुआ।
चाँद आकाश में साक्षी बना,
तारा रात्रि का साथी रहा,
प्रेम ने दूरियों को पार कर लिया,
एक आत्मा दूसरी से जुड़ी रही।
जी आर कवियुर
20 06 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)
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