Wednesday, June 24, 2026

अपरिचित पथ का किनारा

अपरिचित पथ का किनारा

अनजानी राह पर कदम बढ़े,
नए दृश्य आश्चर्य बनकर खिले,
समीर ने कानों में कथाएँ कही,
यात्री विस्मय से ठहर गया।

वृक्षों ने छाया से स्वागत किया,
पक्षियों ने मधुर संगीत सुनाया,
पुष्पों ने रंगों से मुस्कुराहट दी,
प्रकृति मित्र बन साथ चली।

हर मोड़ ने रहस्य उजागर किए,
अनुभव ने नया अर्थ प्रदान किया,
साहस आगे मार्गदर्शक बना,
जीवन खोज की यात्रा बन गया।

जी आर कवियुर 
20 06 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)

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