Friday, June 26, 2026

गहराइयों की पुकार

गहराइयों की पुकार

नीला सागर आँखों को बुलाता रहा,
लहरों ने तट से रहस्य कहे,
अनदेखी दुनिया ने हाथ बढ़ाए,
मन यात्रा के लिए तैयार हुआ।

मोती मौन में प्रतीक्षा करते रहे,
मूंगे रंगों से चमकते रहे,
लहरों की धुन गूंजती रही,
प्रकृति ने अपना विस्मय खोल दिया।

साहस गहराइयों में उतर गया,
अनुभव ने अनमोल निधियाँ पाईं,
ज्ञान प्रकाश बनकर जगमगाया,
जीवन नए अर्थों में खिल उठा।

जी आर कवियुर 
26 06 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)

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