यादों की रजनीगंधा ( ग़ज़ल)
दिल में तेरी याद जगाती रजनीगंधा,
रातों को खुशबू लुटाती रजनीगंधा।
चाँद उतरा है मेरे आँगन में चुपके से,
ख़्वाब की दुनिया सजाती रजनीगंधा।
दूर जब भी तेरी आहट-सी सुनाई दे,
मुझको तेरे पास बुलाती रजनीगंधा।
रात की ख़ामोशियों में डूबकर अक्सर,
प्यार के नग़मे सुनाती रजनीगंधा।
जब तन्हाई दर्द बनकर दिल पे छा जाए,
बीते लम्हों को रुलाती रजनीगंधा।
ओस की बूँदों से धुलकर और निखरती,
हर दिशा को यूँ महकाती रजनीगंधा।
उम्र की धूपों में जब मन हारने लगता,
आश का दीपक बचाती रजनीगंधा।
"जी आर" तेरे इश्क़ की ख़ुशबू रहे कायम,
ज़िक्र तेरा ही कराती रजनीगंधा।
जी आर कवियुर
25 06 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)

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