समुद्र तट की खामोशी में,
एक लहर स्थिर हो गई।
आगे बढ़ने की चाह होते हुए भी,
वह एक पल को ठहर गई।
आकाश की नीली आँखों में,
संध्या के रंग झिलमिला उठे।
लहरों का छिपा हुआ संगीत,
हृदय में गूंजता रहा।
गति के भीतर की निस्तब्धता,
जीवन का पाठ सिखा गई।
उस स्थिर लहर में,
समय स्वयं प्रतिबिंबित हुआ।
जी आर कवियुर
10 06 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर)
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