Saturday, June 20, 2026

ओस की बूंद की यात्रा

ओस की बूंद की यात्रा

भोर में पत्ते पर मोती बनकर जन्मी,
शीतलता की गोद में चुपचाप ठहरी,
किरणों ने छूकर चमक भर दी,
प्रकृति ने स्नेह से उसे अपनाया।

पंखुड़ी के किनारे धीरे-धीरे चली,
सुगंध भरे मार्गों का अनुसरण किया,
मंद समीर के संग दूरियाँ देखीं,
अनुभवों को अपने भीतर संजोया।

सूरज की ऊष्मा में विलीन हो गई,
असीम गगन की ओर ऊपर उठी,
बदलते रूपों में सत्य को पहचाना,
उसकी कथा नए सफर में आगे बढ़ी।

जी आर कवियुर 
20 06 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)

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