प्रकाश की पंक्तियाँ
भोर की पहली किरणें,
खिड़की से भीतर उतर आईं।
अंधकार की मुड़ी परतों पर,
प्रकाश ने अपनी पंक्तियाँ लिखीं।
पेड़ों की छायाओं के बीच,
सुनहरी आभा फैल गई।
नए दिन की मधुर साँस,
धरती पर भरती चली गई।
हर उजली रेखा में,
आशा खिलती दिखाई दी।
प्रकाश की उन पंक्तियों संग,
जीवन आगे बढ़ता गया।
जी आर कवियुर
06 06 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)
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