Wednesday, June 24, 2026

रात और रजनीगंधा

रात और रजनीगंधा

शांत रात की गोद में,
चाँद बिखेरे उजियारा।
रजनीगंधा महक उठी,
मन ने सपना सँवारा।

धीरे-धीरे पवन चली,
लेकर मीठी खुशबू आई।
दिल की बातें कहती हुई,
याद किसी की संग लाई।

तारों वाली इस रात में,
मन कुछ खोया-खोया है।
रजनीगंधा की महक संग,
प्रिय का चेहरा संजोया है।

जी आर कवियुर 
25 06 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)

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