रात और रजनीगंधा
शांत रात की गोद में,
चाँद बिखेरे उजियारा।
रजनीगंधा महक उठी,
मन ने सपना सँवारा।
धीरे-धीरे पवन चली,
लेकर मीठी खुशबू आई।
दिल की बातें कहती हुई,
याद किसी की संग लाई।
तारों वाली इस रात में,
मन कुछ खोया-खोया है।
रजनीगंधा की महक संग,
प्रिय का चेहरा संजोया है।
जी आर कवियुर
25 06 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)
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