धरती पर शांति खिल जाए
युद्धों की आवाज़ थम जाए
आँसुओं की जगह
हर चेहरे पर मुस्कान सज जाए
भूखे पेटों में
अन्न भर जाए
सूने बर्तन
भर-भर कर सज जाए
गरीबी रास्ता बदल ले
ज़िंदगी आगे बढ़ जाए
मेहनत के हर दाने से
कल की उम्मीद जग जाए
सरहदें दीवार न बनें
पुल बनकर जुड़ जाएँ
देश और मज़हब से ऊपर
इंसान, इंसान बन जाए
नफ़रत धीरे मिट जाए
इंसानियत ऊँची उठ जाए
पहले जीना हर कोई सीखे
फिर प्यार करना आ जाए
यह धरती
एक परिवार बन जाए
अन्न और शांति
सबको बराबर मिल जाए
“लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु
ॐ शांति शांति शांति”
जी आर कवियुर
01 01 2026
( कनाडा, टोरंटो)
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