पुराने गुलमोहर की छाया में
हमारी यादें धीरे-धीरे बिखरी
आँसुओं में हँसी, दिल में प्यार
दिन की रौशनी भी न उसे मिटा पाए
लाल फूल, जैसे दिल का अपना रंग
आँखों में चमके, याद बन कर संग
हवा के स्पर्श में धीरे-धीरे हिले
पक्षियों के गीत जैसे गुनगुनाए
जीवन की राहों में, तुम और मैं
सालों बाद, फिर से मिले यहाँ
तारों की खामोशी ने सुनी हमारी
यादों की कोमलता फिर खिल उठी
जी आर कवियुर
14 01 2026
(कनाडा, टोरंटो)
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