Wednesday, January 14, 2026

लाल मिर्च की शान

लाल मिर्च की शान

मानव के सपने, उनका गर्व है ऊँचा  
राजनीति, समझौते, विश्वास सब हो जाते फँसा  
कल हो सकता है खुशी, या अकेले दिल का बंटवारा  
नींद भी एक छोटा सा मृत्युवाले किनारा  

सब कुछ तय करता केवल एक — भगवान ऊपर  
मनुष्य सोचता है राजा, प्यार और शक्ति का धनी  
फिर भी वही बनाता राह, अदृश्य और अज्ञात  
लाल मिर्च जलती आग में, चमकती और प्रखर  

फूलों के बीच वह हँसती, जानती अपनी कीमत  
मोहकता, ताकत, स्वाद — सब उसके भीतर समेट  
अन्य मिर्चों में वह सबसे आगे खड़ी  
“मैं सबसे गर्म, मैं ही दुनिया की रानी” कहती  

उसकी अनोखी तीखापन बदलता कुछ नहीं  
उसकी याद में — स्वाद, सुंदरता, गर्व झिलमिलाती  
संपूर्ण संसार में मनुष्य प्रकृति को छोटा समझता  
लेकिन केवल भगवान देखता हर कदम, हर दिशा  

मिर्च की गर्मी, मानव की परीक्षाएँ, जीवन की कसौटी  
सब एक ही रास्ते पर — सृष्टि, स्थिति, विनाश की गाथा  
आकाश और पृथ्वी के बीच केवल एक चलता स्वतंत्र  
जीवन, मृत्यु, गर्व, प्रेम — प्रवाहित होते लगातार  

फूल की मिठास, लाल मिर्च, मानव के सपने भी  
भगवान की योजना में बुनाई हुई, सबका दृश्य समा  
वे सब एक कविता में जुड़ते, नृत्य और गीत गाते  
कवि की कलम से, शब्द शक्तिशाली होकर बहते

जी आर कवियुर 
13 01 2026
 (कनाडा, टोरंटो)

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