जीने की वजह ही तेरा प्यारा नाम ही सही
इस दिल की महफ़िल में तेरी याद ही सही
तू साथ न हो तो क्या, तेरी ख़ुशबू है क़रीब
सूनी सी रातों में बस तेरा एहसास ही सही
हमने तो हर मोड़ पे तुझको ही चाहा है
मंज़िल न सही, राहों में तेरा ख़्वाब ही सही
टूटे हुए लफ़्ज़ों से क्या शिकवा करें अब
आँखों में ठहरा हुआ इक सैलाब ही सही
किस बात का ग़म है जो तू मिला नहीं
इस उम्र के क़िस्सों में तेरा नाम ही सही
जी आर कहे, मुक़द्दर से शिकवा नहीं अब
सांसों की हर धड़कन में तेरा नाम ही सही
जी आर कवियुर
02 01 2026
( कनाडा, टोरंटो)
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