अनसुने तम्बुरु की लय हवा में बहती है
ठंडी हवाएँ हृदय में छुपे दर्द को शांत करती हैं
मध्यान्ह की रात में मधुर ताल की ध्वनि गूँजती है
छोटे दुख दिन की रोशनी में विलीन हो जाते हैं
तारों की चमक विचारों को प्रकाशित करती है
भोर की पहली रोशनी सपनों को संवारती है
रास्ते छिप जाएँ भी, प्रार्थनाएँ कान तक पहुँचती हैं
वृक्षों की पत्तियाँ धीरे-धीरे शांति का स्पर्श देती हैं
नदियों की लहरें लय में नृत्य करती हैं
सूरज की किरणें हर कोना प्रकट करती हैं
हृदय में छुपे अनुभव धीरे-धीरे फैलते हैं
जीवन के संगीत में प्रेम की आवाज़ सुनाई देती है
जी आर कवियुर
10 01 2026
(कनाडा, टोरंटो)
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