Wednesday, January 14, 2026

अनसुने तम्बुरु

अनसुने तम्बुरु

अनसुने तम्बुरु की लय हवा में बहती है  
ठंडी हवाएँ हृदय में छुपे दर्द को शांत करती हैं  
मध्यान्ह की रात में मधुर ताल की ध्वनि गूँजती है  
छोटे दुख दिन की रोशनी में विलीन हो जाते हैं  

तारों की चमक विचारों को प्रकाशित करती है  
भोर की पहली रोशनी सपनों को संवारती है  
रास्ते छिप जाएँ भी, प्रार्थनाएँ कान तक पहुँचती हैं  
वृक्षों की पत्तियाँ धीरे-धीरे शांति का स्पर्श देती हैं  

नदियों की लहरें लय में नृत्य करती हैं  
सूरज की किरणें हर कोना प्रकट करती हैं  
हृदय में छुपे अनुभव धीरे-धीरे फैलते हैं  
जीवन के संगीत में प्रेम की आवाज़ सुनाई देती है

जी आर कवियुर 
10 01 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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