Sunday, January 4, 2026

नैनों का जादुई नशा ( ग़ज़ल)

नैनों का जादुई नशा ( ग़ज़ल)

तेरे नैनों ने कर दिया मुझको जादुई नशा
तन्हाई ने दिल को भी कर दिया जादुई नशा

ख़ामोश रात ने भी पी लिया तेरी यादों का नशा
हर धड़कन ने ओढ़ लिया धीरे-धीरे जादुई नशा

लबों पे आकर ठहर गई बात, आँखों ने सब कह दिया
बिन कहे ही साँसों में घुलता रहा जादुई नशा

तेरी मौजूदगी का आलम क्या कहूँ ऐ हमनशीं
होश में रहकर भी लगने लगा बेख़ुदी सा नशा

वक़्त की रेखाएँ धुँधली, मंज़िलें भी खो गईं
तेरे एहसासों ने मुझ पर कर दिया पूरा नशा

जी आर लिखता रहा शेर, मगर कलम भी चुप न रही
हर अक्षर में उतरता गया तेरा जादुई नशा

जी आर कवियुर 
04 01 2026 
( कनाडा, टोरंटो)

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