Sunday, January 25, 2026

छुपा लूँ दिलों को (ग़ज़ल)

छुपा लूँ दिलों को (ग़ज़ल)


जुल्फ़ों के साए में छुपा लूँ दिलों को,  
वरना हम यूँ ही लूट लेते दिलों को।  

नज़र की ठोकर से जलती हैं रातें,  
सुलगते हैं हम भी बुझा न पाए दिलों को।  

महफ़िल में खामोश हूँ मैं, पर जानो,  
हर इक मुस्कान चुरा लेती हैं दिलों को।  

तेरी यादों की गली में खो गए हम,  
छू कर तेरी तस्वीर खो बैठे दिलों को।  

जी आर की तन्हाई में ढूँढा हर पल,  
बस वही मिली सच्ची मोहब्बत दिलों को।

जी आर कवियुर 
24 01 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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