Thursday, January 22, 2026

“तेरे हृदय की सहमति”

“तेरे हृदय की सहमति”

तेरे हृदय की सहमति मुझे ढूँढते आई  
तेरी खामोश आँखों में प्रेम खिल उठा  
सालों में, दर्द और खुशी दोनों  
हमने जीवन के रास्तों पर साथ चले  

यादें फूलों की तरह खिल गईं  
हमारे हृदय में प्रेम चमकता रहा  
शांत गर्मी की संध्या ने हमें घेरा  
वो क्षण जब लगा कि हम सच में एक हैं  

दूरी कोई मायने नहीं रखती, हम साथ हैं  
समय और मौसम हमें हिला नहीं पाए  
हाथ में हाथ, तेरा हाथ मेरे हाथ में  
जीवन की सारी रातें और दिन हमारे हों

 जी आर कवियुर 
22 01 2026
( कनाडा, टोरंटो)



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