आवारा बनकर वीराने में भी भटका तेरे प्यार के लिए
हर एक मंज़िल छोड़ दी हमने, बस तेरे दीदार के लिए (X2)
हर एक दर्द को सीने से हमने जोड़ा है
तेरी एक मुस्कान की राहत के लिए (X2)
रातों ने हमसे नींद का रिश्ता ही तोड़ दिया
जागते रहे हम सिर्फ़ तेरी याद के लिए (X2)
तू सामने नहीं, फिर भी भरोसा बाक़ी है
दिल ने दुआएँ माँगी हैं हर पल के लिए (X2)
हमने खुदा से भी कभी सौदा नहीं किया
बस सर झुकाया है तेरे इश्क़ के लिए (X2)
ज़माने भर की समझदारी छोड़ आए हैं
थोड़ी सी पागलपन की इजाज़त के लिए (X2)
“जी आर” नाम भी अब अजनबी सा लगता है
जब लोग पूछते हैं हमें, तेरे नाम के लिए (X2)
जी आर कवियुर
14 01 2026
(कनाडा, टोरंटो)
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