सूर्यकिरणों से छूकर इंद्रधनुष आगे लुप्त हुआ
हवा ने हल्के बादलों को उठाकर बिखेर दिया
फूलों के रंग रास्तों पर उतर आए
वृक्षों की पत्तियाँ गहरी छायाएँ रचने लगीं
तारे मद्धम हुए, सपनों ने पुकारा
आधी रात में शांत विचार गूंजे
नदी की लय में संगीत बह चला
उषा दीप ने हर कल्पना को आलोकित किया
नन्हे पंखों ने आकाश में फैलाव लिया
मिट्टी की सुगंध ने मन को जगाया
प्रकृति के कोमल स्पर्श ने शांति दी
जीवन के वर्तमान में इंद्रधनुष की स्वर सुनाई दी
जी आर कवियुर
12 01 2026
(कनाडा , टोरंटो)
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