Saturday, January 10, 2026

जनमभूमि

जनमभूमि

जनमभूमि के बादलों से छूती यादें  
मिट्टी की खुशबू समय को जागरूक करती है  
पथों पर घूमती यात्राओं की कहानियाँ  
मौन में बिखरी कोमलता की सौगात महसूस होती है  

जंगल और हवाएँ पुराने गीत गाती हैं  
पुराने पत्थर की दीवारों पर छाँव फैली है  
नदियों का खेल-खेल संगीत कानों तक गूंजता है  
समय के पंखों पर विचार उड़ान भरते हैं  

घास के मैदानों का स्पर्श ठंडक पहुँचाता है  
आकाश की रोशनी धीरे-धीरे बिखरती है  
किसान ताल में गाते हुए काम जारी रखते हैं  
जीवन के सुर हृदय में गहराई से समा जाते हैं

जी आर कवियुर 
09 01 2026
(कनाडा , टोरंटो )

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