“हृदय की लय”
हृदय की धड़कन स्थिर लय में बजती है
नदियों के प्रवाह में कोमलता बहती है
पत्थरों और मिट्टी के बीच छाँव छाई रहती है
भोर में अनकही कहानियाँ खुलती हैं जो लगती है
हवाओं में सपने उड़ते पंख फैलाकर
फूलों के बीच छिपी कोमलता प्रकट होती है बार-बार
वृक्षों की पत्तियाँ विनम्रता से झुकती हैं प्यार
मौन रात में विचार गूँजते हैं हर प्यार
नदियों की लहरें कोमल स्पर्श से बहती हैं
सूरज की किरणें मार्गों को प्रकाश देती हैं
मन के गहराई में मुस्कान बहती है मन को छूती हैं
जीवन के गीत में हृदय की आवाज़ गूँजती हैं
जी आर कवियुर
09 01 2026
(कनाडा , टोरंटो )
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