Wednesday, January 21, 2026

“चिट्ठियाँ लिखता नहीं” (ग़ज़ल)

“चिट्ठियाँ लिखता नहीं” (ग़ज़ल)

आज कोई भी चिट्ठियाँ लिखता नहीं  
सबकी नज़र पर अब कहानियाँ लिखता नहीं  

दिल से जो निकले वो लफ़्ज़ खो गए हैं कहीं  
आईने में भी अब सच्ची कहानियाँ लिखता नहीं  

काग़ज़ की ख़ुशबू भी अजनबी हो गई है आज  
यादों के नाम ख़तों की कहानियाँ लिखता नहीं  

हाथों में फोन है, मगर दूरी वही की वही  
रिश्तों को जोड़ने की नई कहानियाँ लिखता नहीं  

ग़ज़ल ने मोड़ लिया अपना चेहरा इस क़दर  
दर्द को दर्द की तरह कहानियाँ लिखता नहीं  

जी आर इस दौर की यही पहचान बन गई  
जो दिल पे बीते वो अफ़साने की कहानियाँ लिखता नहीं


जी आर कवियुर 
21 01 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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