“फूल की कोमलता”
फूल की कोमलता हवा में गा रही है
रंग-बिरंगे पंखुड़ियाँ हृदय को छूती हैं
मृदु लाल रोशनी में
तेरी याद फूलों में घुल जाती है
ठंडी हवा में खुशबू बहती है
नन्हे घंटियों की तरह मृदु आवाज़ गूँजती है
कुछ क्षण चुपचाप
प्रेम के हृदय में चमकते हैं
तारों जैसी चमकती आँखें
फूल की कोमलता, अनुराग का स्पर्श
संध्या की मृदु रोशनी में
हमारा प्रेम शांतिपूर्वक खिलता है
जी आर कवियुर
22 01 202
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( कनाडा, टोरंटो)
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