Thursday, January 22, 2026

जब खिड़की खुली,

जब खिड़की खुली, 

जब खिड़की खुली, हवा आई  
तेरी यादें पंख फैलाकर उड़ गईं  
नीले आसमान में पक्षियों ने मधुर गीत गाए  
मेरा हृदय तेरी उपस्थिति में नाच उठा  

फूल खिले और अपनी खुशबू बिखेरी  
ठंडी हवा में मिट्टी की महक फैल गई  
छाँव के नीचे हम हँसते हुए खड़े रहे  
सौम्य धूप में प्रेम खिल उठा  

नदी के किनारे धीरे-धीरे ध्वनियाँ बह रही थीं  
बादल नीले आसमान में फैल गए  
रात की बारिश में आँसुओं से भीगी आँखें  
मेरा हृदय तेरे स्पर्श में घुल गया


 जी आर कवियुर 
22 01 2026
( कनाडा, टोरंटो)

No comments:

Post a Comment