Friday, January 16, 2026

आधी राह

आधी राह

आधी राह पर ठहर गया हूँ मैं,
साँसों में एक मदमाती मुस्कान है।
कदमों के अर्थ को ढूँढते हुए,
अनजाने छोरों को निहारता हूँ।

कभी-कभी नज़रें नीचे झुक जाती हैं,
सपनों का एक द्वार खुल जाता है।
बिजली की तरह यादें चमकती हैं,
और पल वक़्त संग खेलते जाते हैं।

जीवन-पथ को विस्तृत करने को तैयार हूँ,
पहली किरण की प्रतीक्षा है।
हृदय में आशा का दीप जल उठा है,
और एक नई यात्रा आरम्भ है।

जी आर कवियुर 
16 01 2026
( कनाडा, टोरंटो )

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