हमें तुम सच्चे दिल से पुकारोगे, चले आएँगे
हक़ीक़त जान लो, मुहब्बत होगी तो चले आएँगे
तेरी एक नज़र की देर है बस ऐ सनम
हम हर फ़ासला पल में मिटाकर चले आएँगे
कभी तन्हाई में याद कर लेना हमें
तेरी ख़ामोशी सुनकर हम चले आएँगे
न वक़्त की क़ैद होगी, न हालात का डर
जहाँ भी नाम लोगे तुम्हारा, चले आएँगे
अगर आँसू गिरें तेरी पलकों से कभी
उन्हें अपना समझकर सँभालने चले आएँगे
भरोसा रखो मेरे वफ़ा के सफ़र पर
तेरी हर राह में हमसफ़र बन चले आएँगे
जी आर कहते हैं, ये दावा नहीं एक इकरार है
जहाँ सच्ची मुहब्बत होगी, हम चले आएँगे
जी आर कवियुर
20 01 2026
(कनाडा, टोरंटो)
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