अर्धरात्रि में एक फूल खिलता है
तारों की साँसें जब छूती हैं
अंधेरे की गोद में महक फैलती है
जागता चाँद उसे निहारता है
हवा धीरे से रहस्य कहती है
पत्तियाँ काँपते हुए सुनती हैं
एक अकेली रोशनी राह दिखाती है
खामोशी के भीतर संगीत जन्म लेता है
भटका हुआ सपना मुस्कुरा उठता है
दिल एक पल को ठहर जाता है
अनजाने में आत्मा जाग उठती है
और रात खुद फूल बन जाती है
जी आर कवियुर
16 01 2026
(कनाडा, टोरंटो)
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