आ… हूं…
हूं… आ… हूं…
कहे बिना बीत गया समय
मौन में बहते अनकहे नयन
जन्म न ले सके वे पल
आज भी दिल में थरथराते हैं
कहे बिना बीत गया समय
बिन शब्दों के बंधे हुए दिन
बार-बार सोचा, कई बार मन में
छुपा रखा ख्वाब, अंदर ही अंदर
जैसे उड़ गए शब्द दूर
और छूट गए कहीं अधूरे
थामने की कोशिश करता हूं
काँपते मन का दर्द
टुकड़े चमकते और गायब होते
स्मृतियाँ आँसू बनकर बहती हैं
कहे बिना बीत गया समय
मौन में बहते अनकहे नयन
धीरे-धीरे कदम बढ़ते हैं
समय आगे बढ़ता है
भूलों को सहेजते हुए
प्रार्थनाएँ दिल में जागती हैं
पितृ देवताओं को याद किया
शांत मन, हृदय को सुकून मिला
अनकहे नयन की यादें
साया बनकर साथ चलती हैं
कहे बिना बीत गया समय…
अनकहे नयन के साथ…
जी आर कवियुर
04 01 2026
( कनाडा, टोरंटो)
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