Saturday, January 17, 2026

विचारों के परे

विचारों के परे

विचारों के परे, हृदय शांति से धड़कता है  
प्रभात की कोमलता मन में आनंद भर देती है  
तारों के पंखों पर आकांक्षाएँ पनपती हैं  
हवा की ध्वनि स्मृतियों के प्रवाह में मिल जाती है  

आसमान की नीली छाया में विश्वास फैलता है  
स्मृतियों की नींद में एक लय बहती है  
नदी की लहरों में भावनाएँ उमड़ती हैं  
चाँदनी की रौशनी में राग फैलता है  

जीवन एकांत में नया रूप लेता है  
आशा की नाव में एक स्वर बहता है  
आंखों में भावनाओं की लहर चमकती है  
प्रभात की कोमलता में प्रेम खिलता है

जी आर कवियुर 
16 01 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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