एक साँस काफी है
ज़िंदा होने को
एक आवाज़ काफी है
आसमान छूने को
आज समझ में आया
जीने का मतलब क्या है
ख़ामोशी भी
अब गीत गाती है
तू देखे जब
बादल झुक जाते हैं
दिल के अँधेरे
रोशनी सीख जाते हैं
बिन पंखों के भी
उड़ना आ गया
ज़मीन पर रहकर
आसमान मिल गया
एक साँस काफी है
दिल जलाने को
एक एहसास काफी है
ख़ुद को पाने को
तू दिन को जब
दुआ दे देता है
हर बोझ मेरा
हवा बन जाता है
जो डर ठहर गए थे
मन के कोने में
चुपचाप खो जाते हैं
वक़्त के साए में
आज भी कल भी
यह साँस चलेगी
तेरे साथ होने की
उम्मीद जलेगी
जी आर कवियुर
06 01 2026
(कनाडा, टोरंटो)
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