Saturday, January 17, 2026

“मौत के पार” ( सूफी ग़ज़ल)

“मौत के पार” ( सूफी ग़ज़ल)

मौत के पार जो राह दिखाए कोई,  
उस नूर की तलाश में हर दिल आए कोई।(X2)  

इस जहां की उलझनों से दूर चले हम,  
रूह के सफर में मिल जाए वो अमूल्य कोई।(X2)    

धड़कनों में छुपा है जीवन का सच,  
मृत्यु के बाद भी साथ रहे वो कोई।(X2)    

अंधेरों से पार उतरे, रौशनी की ओर,  
रूह की प्यास बुझाए वही कोई।(X2)  

हर सांस में याद उसका, हर पल उसकी गूँज,  
मोहब्बत की राह में दिखाए रास्ता कोई।(X2)  

मौत भी माया है, जीवन की सीख है,  
जी आर की तन्हाई में मिलता सुकून वही कोई।(X2)

जी आर कवियुर 
16 01 2026
(कनाडा , टोरंटो)

No comments:

Post a Comment