Friday, January 2, 2026

“तेरे लिए” ( ग़ज़ल)

“तेरे लिए” ( ग़ज़ल)

किस कदर मैं जी रहा हूँ तेरे लिए
जिस्म और जान से जीता हूँ तेरे लिए

तेरी हर बात में ढूँढा है अपना मंज़िल
तेरी हर याद में खो गया हूँ तेरे लिए

चाँदनी रातें भी अब तुझसे ही रोशन हैं
तारों की छांव में सोया हूँ तेरे लिए

धड़कनों में बस गई है तेरी ही खुशबू
हर साँस में महसूस किया हूँ तेरे लिए

मौत भी आए तो डरता नहीं मैं अब
इस दिल को सजाया है मैंने तेरे लिए

जी आर की दुआ यही है रब से
सफर ये सजा है हमने तेरे लिए

जी आर कवियुर 
02 01 2026 
( कनाडा, टोरंटो)

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