Friday, January 9, 2026

समुद्र का डाकेता

समुद्र का डाकेता 

समुद्र पार करते समय डाकेता दिखाता है गति  
बरसात की बूँदें गिरती हैं, पत्थरों पर बिखरती हर जगह  
पहाड़ों और रास्तों से वह सावधानी से चलता है  
उंगलियों की तरह, उसकी चाल बहती है हर दिशा में  

हवा के उन्माद में वह छिपा स्थान खोजता है  
अंधेरे की परवाह किए बिना वह चलता रहता है  
नदियों की उपस्थिति भी उसे नहीं रोक पाई  
ठंडी बारिश और बर्फ ने भी नहीं रोका रास्ता  

काली रात में ठंडक उसके शरीर पर रहती है  
सपनों का वातावरण गवाह बनता है  
अदृश्य कहानियाँ फैलती हैं हर ओर  
अकेले सफर के माध्यम से दुनिया रहस्य जानती है


जी आर कवियुर 
08 01 2026
(कनाडा , टोरंटो )

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