ठंडी बारिश
ठंडी बारिश पहाड़ों पर धीरे-धीरे गिरती है
रात की राहें कोहरे में लिपटी रहती हैं
मिट्टी की खुशबू हृदय में भर जाती है
पत्तियाँ ठंडे बूँदों में चमकती हैं
हवा धीरे-धीरे पेड़ों को स्पर्श कर जाती है
नदियाँ शांत रूप से नीले पानी में बहती हैं
पक्षी खुशी से गीत गाते हैं
बारिश की बूँदें फूलों पर मुस्कुराती हैं
पानी दोनों किनारों को स्नेहपूर्वक छूता है
यादें ऊपर से धीरे-धीरे टपकती हैं
पल ठंडी बारिश में भीग जाते हैं
सपने नींद को ठंडक के साथ छूते हैं
जी आर कवियुर
20 01 2026
(कनाडा, टोरंटो)
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